शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

सूत्र-72


जहाँ भावना की जड़ें मजबूत होती है, वहाँ आदर्शों की नींव कमजोर होने लगती है

4 टिप्‍पणियां:

  1. सर्मपण से होता है दुखों का अन्त

    ईश्वर सर्वशक्तिमान है वह आपके दुखों का अन्त करने की शक्ति रखता है। अपने जीवन की बागडोर उसे सौंपकर तो देखिये। पूर्वाग्रह,द्वेष और संकीर्णता के कारण सत्य का इनकार करके कष्ट भोगना उचित नहीं है। उठिये,जागिये और ईश्वर का वरदान पाने के लिए उसकी सुरक्षित वाणी पवित्र कुरआन का स्वागत कीजिए।


    भारत को शान्त समृद्ध और विश्व गुरू बनाने का उपाय भी यही है।


    क्या कोई भी आदमी दुःख, पाप और निराशा से मुक्ति के लिये इससे ज़्यादा बेहतर, सरल और ईश्वर की ओर से अवतरित किसी मार्ग या ग्रन्थ के बारे में मानवता को बता सकता है?

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  2. तो क्या करें ,भावना को छोड़ दें

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