गुरुवार, 7 अक्तूबर 2010

सूत्र - 103


कलाएँ सभ्यता का सेफ्टी वॉल्व है.

2 टिप्‍पणियां:

  1. “नन्हें दीपों की माला से स्वर्ण रश्मियों का विस्तार -
    बिना भेद के स्वर्ण रश्मियां आया बांटन ये त्यौहार !
    निश्छल निर्मल पावन मन ,में भाव जगाती दीपशिखाएं ,
    बिना भेद अरु राग-द्वेष के सबके मन करती उजियार !!
    हैप्पी दीवाली-सुकुमार गीतकार राकेश खण्डेलवाल

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