शुक्रवार, 11 मार्च 2011

सूत्र - 116


जब कर्म ही लक्ष्य हो जाए और सफर मंजिल, तो जीवन ‘तृप्ति’ हो जाती है और इंसान योगी.

शुक्रवार, 4 मार्च 2011

सूत्र - 115


जहाँ न स्वार्थ होता है और न मजबूरी वहीं विशुद्ध प्यार होता है, लेकिन जहाँ प्यार होता है वहाँ मजबूरी भी होती है.

शनिवार, 26 फ़रवरी 2011

सूत्र - 114


ईश्वर रहस्य की रचना करता है और संतत्व जगाता है, मनुष्य सपने रचता है और वासना जगाता है.

शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

सूत्र -113


सौंदर्य निरापद(risk-free)नहीं होता.

शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

सूत्र - 112


जो दुख के लिए खुले नहीं होते, उनका जीवन डर बन जाता है.

रविवार, 26 दिसंबर 2010

सूत्र - 111


मृत्यु जीवन से अर्थ छीन लेती है.

सोमवार, 13 दिसंबर 2010

सूत्र - 110


जरा सा जुनून चेतना के चौकन्नेपन से निजात दिला सकता है.