रविवार, 6 जून 2010

सूत्र-85

जिंदगी प्यास है, तृप्ति मौत.

4 टिप्‍पणियां:

  1. प्रिय मालविका जी ,
    आपका चित्र और विचार एक साथ पोस्ट करने वाला प्रयोग काफी अच्छा लगा , अधिकतर तो मेरे जैसे कलमघिस्सू कि तरह लम्बी लम्बी बोरिंग कविताये और पोस्ट लखते हैं बिना किसी फोटो के . खैर धन्यवाद आपका ब्लॉग की नयी विधा अन्वेषण के लिए .
    लेकिन मौत कम से कम सुकून तो देती हैं . जिंदगी तो बस रुला देती हैं . कभी मुझमे यही जज्बा था . जब ईश्वर तबाही मचाने आया तो मेरे पास ढाल भी नहीं थी . ईश्वर आपको अपने जज्बे में बरकत दे

    --
    !! श्री हरि : !!
    बापूजी की कृपा आप पर सदा बनी रहे

    Email:virender.zte@gmail.com
    Blog:saralkumar.blogspot.com

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