गुरुवार, 17 जून 2010

सूत्र - 89


सफ़र रोमांस है और मंज़िल दुनियादारी.

2 टिप्‍पणियां:

  1. ख़ामोशियों की मौत गवारा नहीं मुझे/ शीशा हूँ टूट कर भी खनक छोड़ जाऊँगा.... बस इतना ही


    zabardast aatmvishwaas bharee touchy pankti hai, badhai

    उत्तर देंहटाएं