शनिवार, 5 दिसंबर 2009

सूत्र-29



अनिश्चितता से बड़ी दुनिया में और कोई यातना नहीं है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसा भी क्या !
    अनिश्चितता को आशा में परिवर्तित कर लेने से शायद शब्दार्थ बदला जा सकता है.

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