रविवार, 6 दिसंबर 2009

सूत्र-30


प्राकृतिक न्याय अपने मूल स्वरूप में क्रूर होता है।

1 टिप्पणी:

  1. क्षमा कीजिये, प्राकृतिक न्याय क्रूर लगता है, होता नहीं !

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